कब होगा आजाद बस्तर

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बस्तर संस्कृति और इतिहास का साक्षी समय और वक्त का फेर है कि उसे आज नक्सली प्रभावित क्षेत्र कहा जाता है। बस्तर की शांति बस्तर का पर्यावरण और बस्तर के राज रियासत का इतिहास गवाह है । बस्तर की शांति का बस्तर की प्रगति का बस्तर एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है जो संस्कृति की परख विचारधाराओं और इतिहास को संजोये हुए रखा हुआ है। बस्तर में यू तो बहुत सी जगह है देखने के लिए परंतु यहां का इतिहास दंतेश्वरी मंदिर से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल का यह मंदिर सीनतान के खड़ा हुआ है। बस्तर के इतिहास से बहुत सारी बातें जुड़ी हुई है। चाहे राजा भन्ज देव का युद्ध हो चाहे यहां के भोले भाले आदिवासियों के रहन सहन की परंपरा हो। हमारे रिपोर्टर ने बस्तरमें देखा कि बस्तर बहुत ही शांत जगह है। चारों ओर जंगल से अच्छादित हरी भरी पहाड़ियों से भरा बस्तर परंतु यहां पर नक्सली आमद की वजह से नक्सलियों के पद चाप और परेड की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है। वही मिलिट्री के सैनिकों का परेड अपने कैंपों में होता नजरआता है।। बस्तर में नक्सली विचारधारा पैर पसारकर फैली हुई है चारों ओर शांतिका माहौल तो है परंतु नक्सली आंदोलन जो कि जल जंगल जमीन के लिए है। वह चल रहा है। जहां नक्सली आंदोलन अपनी प्रचंड सीमा पर है। वही बस्तर का भाईचारा आपसी प्रेम अटूट बना हुआ है। बस्तर के आदिवासी आज भी काठा में समान बेचते हैं। कूढे में सामान बेचते है  और प्रसन्नचित जीवन जीते हैं। बस्तर मे एक अलग ही आजादी महसूस होती है जो और कहीं नहीं है। हमारे संवाददाता ने वहां के लोगों से बात की लोगों का कहना था कि हमारे जीवन में किसी भी प्रकार का कोई हस्तक्षेप नही है। बस्तर में अमित शाह के बयान के बाद 2026 तक नक्सली हथियार छोड़ दे अन्यथा सरकार अपना रास्ता अपनाएगी वह कारण हो या नक्सलियों के विचार में परिवर्तन कारण हो नक्सली तो मुख्य धारा में आ रहे हैं। नक्सलियों का आंदोलन जल जंगल जमीन यथार्थ है परंतु अब नक्सलियों के द्वारा मुख्य धारा में आने के बाद उन्हें क्या करना है यह तय करने का विषय है। यह तो है नक्सलियों वाली बात। बस्तर के आदिवासी का जीवन दुर्भर ना हो यह भी ध्यान रखने का विषय है। बस्तर की आजादी और यहां की लोक संस्कृति को किसी की नजर ना लगे। जिस  कदर सरकार अदाणी और बड़े पैसे वालों को यहां की भूमि और खदान देने की तैयारी  कर रही है। वह हरित क्रांति के क्षेत्र में चिंता का विषय है। आजाद बस्तर कब होगा जब यहां की हरित क्रांति बनी रहेगी। बस्तर को हरित क्षेत्र घोषित करने की मांग कई संगठनों द्वारा की जा चुकी है। बस्तर को किसी दलाल की नजर न लगे। यह उम्मीद की जाती है।

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