50 वर्षीय एडवोकेट यादव रोजाना की तरह मंगलवार सुबह हाई कोर्ट पहुंचे थे। दोपहर तक वे नियमित प्रकरणों की सुनवाई में व्यस्त रहे। इस बीच एक प्रकरण में पैरवी के लिए वे हाई कोर्ट के कक्ष नंबर 13 में पहुंचे। यहां पैरवी के बाद बाहर निकलकर वे साथी वकीलों से चर्चा कर रहे थे कि अचानक उन्हें बेचैनी होने लगी। वे तुरंत हाई कोर्ट परिसर में बनी डिस्पेंसरी में पहुंचे।
प्रतिनिधि, इंदौर। मंगलवार दोपहर हाई कोर्ट एडवोकेट विकास यादव की तबीयत अचानक बिगड़ी। उस वक्त वे एक प्रकरण में पैरवी कर कोर्ट कक्ष से बाहर निकले थे। उन्हें तत्काल पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां लिफ्ट में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया।
50 वर्षीय एडवोकेट यादव रोजाना की तरह मंगलवार सुबह हाई कोर्ट पहुंचे थे। दोपहर तक वे नियमित प्रकरणों की सुनवाई में व्यस्त रहे। इस बीच एक प्रकरण में पैरवी के लिए वे हाई कोर्ट के कक्ष नंबर 13 में पहुंचे।
यहां पैरवी के बाद बाहर निकलकर वे साथी वकीलों से चर्चा कर रहे थे कि अचानक उन्हें बेचैनी होने लगी। वे तुरंत हाई कोर्ट परिसर में बनी डिस्पेंसरी में पहुंचे। यहां डाक्टरों ने उन्हें कुछ गोलियां दीं।
इसके बाद वे साथी वकील के साथ दोपहिया वाहन से पास के अस्पताल गए। वहां लिफ्ट से उपर जाते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। डाक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। एडवोकेट यादव खातेगांव के मूल निवासी थे।
