
छत्तीसगढ़ में 40,000 आदिवासी महिलाओं से 120 करोड़ रुपए की ठगी हुई है। फ्लोरामैक्स नाम की कंपनी ने खुद किस्त जमा करने के नाम पर महिलाओं को लोन दिलाया था, लेकिन धोखाधड़ी कर कंपनी बंद कर दिया। अब NCST ने हाई लेवल इन्वेस्टिगेशन के निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर की शिकायत पर छत्तीसगढ़ सरकार से फ्रॉड केस में 30 दिन के अंदर डिटेल रिपोर्ट मांगी है। 120 करोड़ रुपए की ठगी केस की अब सेंट्रल की जांच एजेंसी इन्वेस्टिगेशन करेगी।
फ्लोरामैक्स कंपनी ने कोरबा और जांजगीर चांपा की आदिवासी महिलाओं को टारगेट किया था। इन महिलाओं के नाम पर बैंकों से लोन दिलाया, फिर उस पैसे को अपनी कंपनी में निवेश कराया। कंपनी ने लोन की किस्तें बैंकों में जमा ही नहीं किया। महिलाओं ने कई बार प्रदर्शन भी कर चुकी हैं।
कोरबा और जांजगीर चांपा की आदिवासी महिलाओं ने कृषि मंत्री राम विचार नेताम और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन का काफिला रोक लिया। इस पर मंत्री नेताम ने कहा था कि नेतागिरी करने या सड़क जाम करने से काम नहीं बनेगा। वहीं लखन लाल ने कहा था कि ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस से फेंकवा देंगे।
दरअसल, ननकीराम कंवर ने 9 दिसंबर 2024 को केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से शिकायत की थी। उन्होंने मांग की थी कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। पीड़ित महिलाओं को राहत दी जाए।
इसके बाद आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन से रिपोर्ट तलब की थी। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने 16 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव को सुनवाई के लिए बुलाया था। मुख्य सचिव की ओर से बिलासपुर संभाग आयुक्त सुनील कुमार जैन आयोग के सामने उपस्थित हुए और अपना पक्ष रखा।
संभाग आयुक्त ने आयोग को बताया कि फ्लोरामैक्स धोखाधड़ी मामले में अखिलेश सिंह नाम के व्यक्ति ने कंपनी बनाई थी। कंपनी से जुड़े 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 10 को जमानत मिल चुकी है।
संभाग आयुक्त ने आयोग को सूचित किया कि जांच अधिकारी पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के लिए आरोपियों की संपत्तियों की तलाश कर रहे हैं। कुछ संपत्तियां बरामद भी हुई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया था कि मामले का समाधान जल्द, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। आयोग ने कहा कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता और अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं के आर्थिक शोषण से जुड़ा है।
इसलिए, प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) और कोर्ट में प्रस्तुत चालान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर मामले को समयबद्ध तरीके से सुलझाया जा सकता है।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच एजेंसी ने कोर्ट में जो चालान पेश किया है, उसकी प्रति आयोग को उपलब्ध कराई जाए। जांच रिपोर्ट, कार्रवाई की डिटेल रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर पेश करने के आदेश दिए हैं।
दरअसल, 2022 में फ्लोरा मैक्स कंपनी ने महिला समूह के सदस्यों को बैंक से लुभावने बिजनेस लोन दिलाया। कंपनी ने वादा किया था कि लोन की किस्तें वह खुद जमा करेगी, लेकिन कुछ समय बाद कंपनी ने लोन की किस्तें देना बंद कर दिया।
फ्लोरा मैक्स कंपनी की करतूत के बारे में महिलाओं को भनक तक नहीं लगी। 40 हजार महिलाओं से करीब 120 करोड़ अपनी कंपनी में निवेश करने के बाद आरोपी पैसे लेकर फरार हो गए। कंपनी को बंद कर दिए। बैंक वाले जब महिलाओं से कर्ज की वसूली के लिए पहुंचे तो महिलाओं को जानकारी हुई।
आरोपी अखिलेश सिंह और उसके अन्य साथी फ्लोरा मैक्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम कंपनी चला रहे थे। कंपनी का मुख्य शाखा कोरबा और दूसरी शाखा चांपा में खोली गई थी। कंपनी ने फर्जी स्कीम बनाकर आम लोगों और महिला समूह के सदस्यों से 30-30 हजार रुपए जमा करवाए।
बदले में हर सदस्य को हर महीने 2700 रुपए देने का वादा किया। इसके अलावा कंपनी साड़ी, बर्तन, जूते, ज्वेलरी जैसे 35 हजार रुपए का सामान बेचने के लिए देती थी। सामान बेचने के बाद वे फिर से कंपनी में 35 हजार रुपए जमा करवाते थे।
इसके बदले में सदस्यों को 35 रुपए कमीशन मिलता था। कंपनी ने महिलाओं के नाम पर बैंक से लोन लिया था, लेकिन जब अनियमितताएं सामने आईं तो पुलिस और जिला प्रशासन ने फ्लोरा मैक्स सर्विस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सील कर दिया था।
फ्लोरा मैक्स के खिलाफ आदिवासी महिलाएं सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर चुकी हैं। जनवरी महीने में महिलाओं ने आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। कृषि मंत्री राम विचार नेताम के साथ उद्योग मंत्री लखनलाल को घेर लिया था।
इस दौरान मंत्री रामविचार नेताम ने महिलाओं से कहा था कि नेतागिरी करने या सड़क जाम करने से काम नहीं बनेगा। कानून को अपने हाथ में न लें, जो भी इसमें दोषी हैं, उनकी जांच की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री साय से इस मामले की बात की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं को उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने धमकाया था। मंत्री ने कहा था कि अगर ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस से फेंकवा देंगे। मंत्री का यह बयान विवाद का कारण बन गया था। कांग्रेस ने धमकाने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर कर सरकार को घेरा था।
छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने ठगी की शिकार महिलाओं को धमकाया है। मंत्री ने कहा ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस से फेंकवा देंगे। ये सभी महिलाएं कोरबा की हैं, जिनसे फ्लोरा मैक्स नाम की कंपनी करीब 500 करोड़ की ठगी की है। आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी।
छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने ठगी की शिकार महिलाओं को धमकाया है। मंत्री ने कहा ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस से फेंकवा देंगे। ये सभी महिलाएं कोरबा की हैं, जिनसे फ्लोरा मैक्स नाम की कंपनी करीब 500 करोड़ की ठगी की है। आरोपियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी
दरअसल, मंत्री लखनलाल देवांगन का वायरल वीडियो 12 जनवरी का है। कोरबा में कृषि मंत्री राम विचार नेताम के साथ लखनलाल एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। महिलाओं के एक ग्रुप ने दोनों मंत्रियों को घेर लिया था।
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महिलाएं अपने नाम पर लिए गए लोन को माफ करने की मांग कर रही थी। उनका कहना था कि जब तक उनकी समस्याओं का हल नहीं निकलता, वे मंत्री को यहां से जाने नहीं देंगी।
इस दौरान जब मंत्री लखनलाल देवांगन देखा कि महिलाएं हटने को राजी नहीं हैं, तो वे महिलाओं के करीब गए। उन्होंने कहा कि शासन आप लोगों का सहयोग कर रहा है, लेकिन ज्यादा हेकड़ी दिखाओगे तो पुलिस बुलाकर फेंकवा देंगे। इसके बाद महिलाएं आक्रोशित हो गईं।
महिलाओं को मंत्री राम विचार नेताम ने भी कहा कि नेतागिरी करने या सड़क जाम करने से काम नहीं बनेगा। कानून को अपने हाथ में ना लें, जो भी इसमें दोषी हैं, जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। लोन लेने से पहले कंपनी के बारे में जानकारी ले लेनी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में सोशल मीडिया पर लिखा कि ठगी करने वाली कंपनियों से भाजपा नेताओं का ही नाम जुड़ता है। इस बार करोड़ों की ठगी करने वाली कंपनी फ्लोरा मैक्स का उद्घाटन करने में कृषि मंत्री लखनलाल देवांगन का नाम आ रहा है।
पिछली बार भी भाजपा सरकार में चिटफंड कंपनियों के कार्यालय का उद्घाटन भाजपा नेताओं ने ही किया था। लूट-खसोट में भागीदारी भाजपा की पहचान बन गई है।
