पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मीटिंग में जबरन घुस गए। उस वक्त पुतिन तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ मीटिंग कर रहे थे।
यह मामला तुर्कमेनिस्तान का है। यहां इंटरनेशनल पीस एंड ट्रस्ट फोरम की मीटिंग हो रही थी। इस दौरान पुतिन और शहबाज के बीच मीटिंग होनी थी। लेकिन शहबाज को 40 मिनट तक इंतजार कराने के बाद भी पुतिन उनसे मिलने नहीं पहुंचे।
इसी के बाद पाकिस्तानी पीएम जबरन मीटिंग हॉल में घुस गए। हालांकि वे 10 मिनट बाद निकल आए। कुछ देर बाद पुतिन मीटिंग हॉल से निकले और पत्रकारों को देखकर आंखों से इशारा किया।
इस पूरे मामले का वीडियो रशिया टुडे (आरटी न्यूज) ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया है।



यह पहली बार नहीं है जब पुतिन और शहबाज की मुलाकात यूं अजीब तरीके से चर्चा में रही है। जब-जब दोनों नेता मिले हैं, तब-तब ऐसा ही कुछ देखने को मिला है।
इससे पहले पुतिन और शहबाज की चीन में SCO समिट के दौरान बीजिंग में मुलाकात हुई थी। तब पुतिन से बात करते वक्त शरीफ अपना इयरफोन ठीक से नहीं लगा पाए थे।
इसके बाद पुतिन ने शरीफ को ईयरफोन पहनने का तरीका समझाने की कोशिश की। इस दौरान वे मुस्कुराते भी नजर आए।
इससे जुड़े वीडियो में दिख रहा है कि शहबाज शरीफ के कानों से ट्रांसलेशन इयरफोन बार-बार फिसल रहा है, वह उनसे लग नहीं पा रहा। इसके बाद, पुतिन अपना हेडसेट उठाकर उन्हें पहनने का तरीका दिखाने की कोशिश करते हैं।
ठीक 3 साल पहले भी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान ही ऐसा हुआ था।
साल 2022 में उज्बेकिस्तान में SCO समिट से इतर रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ शरीफ द्विपक्षीय बैठक कर रहे थे। इस दौरान उन्हें अपने इयरफोन को एडजस्ट करने में दिक्कत आ रही थी। जब चर्चा शुरू हुई तो उनका हेडफोन बार-बार फिसल रहा था।
हालांकि, इसे ठीक करने की कोशिश की गई लेकिन ये समस्या कुछ समय तक बनी रही, शहबाज के साथ दिक्कतों को देखकर पुतिन को हंसी आ गई थी।
इसी साल तियानजिन में हुई SCO समिट शरीफ, पुतिन का ध्यान आकर्षित करने और उनसे हाथ मिलाने के लिए भी आतुर देखे गए थे।
31 अगस्त को SCO समिट की औपचारिक फोटो सेशन के बाद पुतिन और जिनपिंग साथ-साथ बाहर निकले।
तभी पीछे से अचानक पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ आगे आए और पुतिन की ओर हाथ बढ़ा दिया।
जिनपिंग ने इसे इग्नोर कर दिया, लेकिन फिर पुतिन वापस लौट कर शरीफ से हाथ मिलाया।
इंटरनेशनल पीस एंड ट्रस्ट फोरम एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच है जहां दुनिया के अलग-अलग देशों के नेता, मंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ, शांति से जुड़े संगठन और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर यह चर्चा करते हैं कि दुनिया में शांति और देशों के बीच भरोसा कैसे बढ़ाया जाए। इसका मुख्य मकसद यह होता है कि देशों के बीच तनाव कम हो, बातचीत बढ़े और लोगों के बीच सौहार्द पैदा हो।
यह फोरम आम तौर पर तब आयोजित किया जाता है जब संयुक्त राष्ट्र किसी साल को शांति और भरोसे के लिए समर्पित करता है। 2025 को संयुक्त राष्ट्र ने इंटरनेशनल ईयर ऑफ पीस एंड ट्रस्ट घोषित किया था, और उसी के हिस्से के रूप में तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अशगाबात में यह फोरम आयोजित किया गया। इसमें कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस फोरम में दुनिया के सामने मौजूद संघर्ष, विवाद, युद्ध, क्षेत्रीय तनाव, सांस्कृतिक मतभेद और संवाद की कमी जैसे मुद्दों पर खुलकर विचार विमर्श होता है। इसका मकसद यह भी है कि युवा पीढ़ी में शांति को लेकर जागरूकता बढ़े और समाज में भरोसा कायम रहे। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इसमें भाग लेते हैं ताकि एक साझा समझ विकसित हो सके कि वैश्विक शांति के लिए किन कदमों की जरूरत है।
इस मंच का फायदा यह है कि देशों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के या आधिकारिक बातचीत के जटिल ढांचे के बाहर आकर एक हल्के माहौल में संवाद करने का मौका मिलता है। इससे रिश्तों में नरमी आती है और आपसी विश्वास बढ़ता है। यह फोरम विवादों को हल करने का सीधा स्थान नहीं है, लेकिन यह माहौल बनाता है जिससे आगे समाधान की दिशा मजबूत हो सकती है।
इसे हर साल नहीं किया जाता, लेकिन जब भी किसी देश या संयुक्त राष्ट्र द्वारा शांति और भरोसे पर विशेष जोर दिया जाता है, तब यह फोरम आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया को अधिक स्थिर, सुरक्षित और सहयोगशील बनाना है।
