मुंबई देश की आर्थिक राजधानी कही जाती है। मुंबई मायानगरी है। पूरे देश से युवा लड़के-लड़कियां यहां सपने पूरे करने आते हैं। एक्टिंग की दुनिया में नाम कमाने और ग्लैमर की दुनिया में खुद को साबित करने का जज्बा कई लड़कियों और लड़कों के दिलों में घूमता है। लेकिन यहां की तस्वीर कुछ और ही है। मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 18 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मुंबई पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जून से दिसंबर के पहले सप्ताह तक मुंबई से 370 से अधिक किशोर-किशोरियां गायब हो चुके हैं। इनमें 268 लड़कियां हैं, यह आंकड़ा कुल मामलों का लगभग 72 प्रतिशत है। ओवरऑल देखें तो औसतन हर महीने 60 बच्चे गायब हो रहे हैं। नाबालिग किशोरियों का गायब होना इनकी सुरक्षा के प्रति गंभीर चिंता पैदा कर रही है।मुंबई पुलिस के मिसिंग सेल में कार्यरत एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई मामलों में कम उम्र की लड़कियां दोस्तों के साथ चली जाती हैं या प्रेम प्रसंग के चलते घर छोड़ देती हैं। हालांकि, कुछ मामलों में मानव तस्करी समेत अन्य मामले भी देखे गए हैं, जिन्हें गंभीरता से लेते हुए बारीकी से जांच की जाती है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल ट्रैकिंग और लोकल इन्फर्मेशन के जरिए गुमशुदा बच्चों की तलाश होती है, लेकिन नई शिकायतें दर्ज होने की संख्या में वृद्धि हर महीने मिसिंग सेल की चुनौतियों को बढ़ा रही हैं।600 से अधिक मिसिंग बच्चों को खोजने का रिकॉड बना चुके मुंबई पुलिस के कर्मी राजेश पांडे का कहना है कि माता पिता के अलावा घर परिवार और स्कूल प्रशासन को भी किशोर किशोरियों के बदलते व्यवहार, बदलाव और सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है। खासतौर से माता पिता को बच्चों के अचानक गायब हो जाने की स्थिति में बिना देरी किए तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए। यह हम सबकी जिम्मेदारी है।