कटनी में जिस दलित युवक को सरपंच और उसके बेटे ने लात–घूंसों से पीटा, मुंह पर पेशाब की, वह घर से बाहर नहीं निकल पा रहा। उसने अवैध खनन का विरोध किया था। युवक का कहना है कि सभी आरोपी फरार हैं। अगर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो आत्महत्या कर लूंगा। इसकी जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की होगी
पीड़ित ने 16 अक्टूबर को कटनी एसपी को शिकायत की थी। एसपी के निर्देश पर उसी दिन स्लीमनाबाद थाने में सरपंच रामानुज पांडेय, बेटा पवन पांडेय, भतीजे सतीश पांडेय और सरपंच के कर्मचारी राम बिहारी हल्दकर के खिलाफ एससी/एसटी समेत मारपीट और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया गया।
लोगों से भरी बस लेकर एसपी ऑफिस गए सरपंच कटनी जिला मुख्यालय से जबलपुर रोड पर स्लीमनाबाद से मुख्य सड़क पर बंधी गांव के पास पीड़ित का गांव है। आबादी करीब 2500 लोगों की। यहां चौधरी, यादव, ब्राह्मण और पटेल समाज के लोग रहते हैं। इनमें 150 घर चौधरियों और 30 घर ब्राह्मणों के हैं।
सुबह करीब 10 बजे टीम गांव पहुंची। यहां मुख्य द्वार पर बस खड़ी थी। 17 से 20 लोग मौजूद थे। लोगों से सरपंच रामानुज के बारे में पूछा, तो लोगों वहां खड़े एक शख्स की ओर इशारा कर बताया। वहां कुर्ता-पायजामा पहने शख्स लोगों को बस में बैठा रहा था।
पूछने पर पता चला कि सभी लोग कटनी एसपी से शिकायत करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरपंच पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। इस कारण एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। थोड़ी देर में बस कटनी की ओर रवाना हो गई।
इसके बाद हम गांव में अंदर चल दिए। यहां पीड़ित के घर का पता पूछा। एक शख्स संयोग से उसी के परिवार का सदस्य निकला। उसने युवक के घर तक छोड़ा। अंदर कुर्सी पर बैठा पीड़ित अपनी मां के साथ बात कर रहा था। रिपोर्टर ने अपने बारे में बताया। फिर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला।
लोगों से भरी बस लेकर एसपी ऑफिस गए सरपंच कटनी जिला मुख्यालय से जबलपुर रोड पर स्लीमनाबाद से मुख्य सड़क पर बंधी गांव के पास पीड़ित का गांव है। आबादी करीब 2500 लोगों की। यहां चौधरी, यादव, ब्राह्मण और पटेल समाज के लोग रहते हैं। इनमें 150 घर चौधरियों और 30 घर ब्राह्मणों के हैं।
सुबह करीब 10 बजे टीम गांव पहुंची। यहां मुख्य द्वार पर बस खड़ी थी। 17 से 20 लोग मौजूद थे। लोगों से सरपंच रामानुज के बारे में पूछा, तो लोगों वहां खड़े एक शख्स की ओर इशारा कर बताया। वहां कुर्ता-पायजामा पहने शख्स लोगों को बस में बैठा रहा था।
पूछने पर पता चला कि सभी लोग कटनी एसपी से शिकायत करने जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरपंच पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। इस कारण एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी। थोड़ी देर में बस कटनी की ओर रवाना हो गई।
इसके बाद हम गांव में अंदर चल दिए। यहां पीड़ित के घर का पता पूछा। एक शख्स संयोग से उसी के परिवार का सदस्य निकला। उसने युवक के घर तक छोड़ा। अंदर कुर्सी पर बैठा पीड़ित अपनी मां के साथ बात कर रहा था। रिपोर्टर ने अपने बारे में बताया। फिर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला।
पीड़ित बोला- अवैध खनन से रोका था, इसलिए पीटा पीड़ित ने कहा- 13 अक्टूबर की शाम करीब 6 बजे मैं अपने खेत पर गया था। वहां मुझे जेसीबी की आवाज सुनाई दी। देखा, तो कुछ लोग 256 नंबर घटिया रामगड़ा की पहाड़ी पर मुरम की खदान पर जेसीबी से खुदाई कर रहे थे। यहां कई दिन से खुदाई चल रही थी।
उनसे पूछा कि मुरम खोदकर कहां ले जा रहे हो? यहां मौजूद राम बिहारी हल्दकर ने कहा कि तू कौन होता है पूछने वाला (जातिगत गाली के साथ)?, तुझे काट कर फिंकवा देंगे। चला जा यहां से। मैंने कहा कि गांव का होने के नाते पूछ रहा हूं। उनकी धमकी से मैं डर गया और वापस आ गया।
मैं अपनी मां को लेकर घर की ओर चल दिया। रास्ते में राम बिहारी समेत अन्य लोगों ने ट्रैक्टर आड़ा लगाकर रोक लिया। गाली-गलौज करने लगे। मां ने मना किया, तो उनकी चोटी पकड़कर गिरा दिया। चांटे मारकर घसीटा भी।
इसके बाद मेरा कॉलर पकड़कर जमीन पर गिरा दिया। मुझ पर लात-घूंसे बरसाने लगे। लोहे की रॉड से भी पीटा। पवन पांडे ने मेरे मुंह पर पेशाब कर दी। धमकी दी कि थाने जाएगा, तो कटवा कर फिंकवा देंगे। टीआई को फोन लगाने की धमकी दी।
3 दिन भर्ती रहा, रिपोर्ट लिखाने भटकाती रही पुलिस
पीड़ित ने बताया- डर के मारे दूसरे रास्ते से मां–बेटे कटनी के अजाक थाने पहुंचे। यहां से थाने जाने के लिए कहा। मेरी गंभीर स्थिति को देखते हुए मां मुझे सरकारी अस्पताल ले गई। यहां तीन दिन भर्ती रहा। 16 अक्टूबर को अस्पताल डिस्चार्ज हुआ।
यहां से एसपी ऑफिस पहुंचकर शिकायत की। उन्होंने स्लीमनाबाद थाने भेज दिया। उसी दिन थाने पहुंचा। यहां पुलिसकर्मी बोले- अभी नहीं लिखना एफआईआर। पहले विपक्ष को बुलवा लो। जाति प्रमाण पत्र लाने के लिए कहा। करीब चार घंटे इसी तरह भटकाते रहे। थक–हारकर मैं वापस चला गया।
सोचा जान दे दूं, लेकिन बच्चों के लिए जीना ही पड़ेगा भीम आर्मी वालों को इस बात का पता चल गया। वे कार्रवाई की मांग को लेकर थाने आकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद एएसपी संतोष कुमार डेहरिया थाने पहुंचे। थोड़ी देर बाद पुलिसकर्मियों ने मुझे बुलवाया। मैं दोबारा थाने पहुंचा। चार लोगों पर केस दर्ज किया गया, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है।
अब मुझे डर है। घर से बाहर नहीं निकल पा रहा। आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। बहुत गालियां दी हैं। सोचा कि आत्महत्या कर लूं, लेकिन बच्चों के लिए तो जीना ही पड़ेगा। अगर कुछ भी अनहोनी होती है, तो जिम्मेदारी प्रशासन की रहेगी। मैं कब तक घर में बैठा रहूंगा।

15 बार सीएम हेल्पलाइन में शिकायत, नतीजा सिफर दरअसल, साल 2021-22 में ग्राम पंचायत में युवक मैट था। पद से हटाए जाने के बाद उसने पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्यों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। वह साल 2023 से लगातार सूचना का अधिकार (RTI) और सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतें दर्ज करा रहा था।
अक्टूबर 2024 में ग्राम पंचायत में पांचवें वित्त की राशि के खर्च, पंच-सरपंचों के मानदेय, आंगनवाड़ी खुडावल के लिए प्राप्त राशि और आरसीसी नाली निर्माण के मूल्यांकन समेत पांच बिंदुओं पर आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी।
जानकारी न मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की। कोर्ट ने पंचायती ग्रामीण विकास विभाग को नोटिस जारी किया। इसके अलावा, कार्यों की गुणवत्ता को लेकर करीब 15 बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी।
युवक ने बताया कि उसमें लिखकर आ जाता है कि आपके द्वारा की गई शिकायत का निराकरण किया जा चुका है, लेकिन असल में ऐसा होता नहीं। अवैध खनन के बारे में भी कहा गया था, फिर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। युवक का कहना है कि इन्हीं शिकायतों और विरोध के कारण सरपंच ने रंजिश पाल रखी है।

