भारत और ब्रिटेन ने बिना किसी झमेले के कारोबारी संबंधों को गहरा किया है

SHARE:

एक ऐसे समय में जब सोशल मीडिया पर सरेआम धमकियां, जवाबी कार्रवाइयां, और तीखी बयानबाजियां वैश्विक चलन बन गयी हैं, भारत-ब्रिटेन आर्थिक संबंध जिस ढंग से आगे बढ़ रहा है वह एक सुखद बदलाव है। पिछले हफ्ते ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की दो-दिवसीय भारत यात्रा से आर्थिक संबंधों की मौजूदा मजबूती में वृद्धि हुई और उन्हें गहराई मिली। अमेरिका के साथ भारत की बातचीत तनावपूर्ण, अनिश्चित और नाटकीय रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह भी दिखाया है कि वह पहले हो चुके समझौतों की रूपरेखा बदलने को भी उतावले हैं। यूरोपीय संघ के साथ बातचीत कम तनावपूर्ण और नाटकीय रही है, लेकिन नेताओं द्वारा दिये गये सकारात्मक आश्वासनों और समझौते की प्रगति के बारे में वार्ताकारों द्वारा अकेले में कही गयी बातों के बीच निश्चित रूप से अंतर प्रतीत होता है। इस पृष्ठभूमि में, स्टार्मर ने 100 से ज्यादा उद्यमियों, सांस्कृतिक नुमाइंदों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का प्रतिनिधिमंडल लाने का फैसला किया और रक्षा, निवेश व सिनेमा से जुड़े समझौते करके, और इस प्रकार जुलाई में हस्ताक्षरित व्यापार समझौते को और पुख्ता करके, भारत से विदा ली। व्यापारिक संबंधों को गहरा बनाने की उत्सुकता सहज ही समझी जा सकती है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे बड़े बाजारों में से एक है, लेकिन ब्रिटेन के कुल माल निर्यात में उसका हिस्सा 2 फीसदी से भी कम है। भारत के निर्यात में ब्रिटेन का हिस्सा लगभग 3 फीसदी का है। व्यापार बढ़ने की काफी गुंजाइश है। भारत-ब्रिटेन व्यापार में बढ़ोतरी से अमेरिका के दंडात्मक 50 फीसदी टैरिफ (अगर वह बरकरार रहा तो) का असर कुछ कम करने में भी मदद मिलेगी।

भारत अपने पूंजीगत व्यय को क्यों धीमा कर रहा है, इसके अनकहे कारणों में से एक यह है कि उसे अपनी रक्षा खरीद के लिए धन की जरूरत है। स्टार्मर के दौरे ने इस खरीद का कुछ हिस्सा – 350 मिलियन पाउंड के मिसाइल आपूर्ति सौदे के रूप में- ब्रिटेन की झोली में आना पक्का किया। ब्रिटिश सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अब तक 64 भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन में 1.3 बिलियन पाउंड निवेश करने का वादा किया है। यह कहने की जरूरत नहीं कि ब्रिटिश कंपनियों ने भी भारत में निवेश के ऐसे ही वादे किये होंगे, लेकिन पता नहीं क्यों भारत सरकार ने इन्हें अब तक सार्वजनिक नहीं किया है। तब भी, रोल्स-रॉयस जैसी कंपनियों के बयान दिखाते हैं कि उत्साह है। ब्रिटेन में भारतीय आबादी सबसे बड़ा जातीय (एथनिक) अल्पसंख्यक समुदाय है, और यह बात राजनीतिक नेतृत्व से भी छुपी हुई नहीं है। स्टार्मर ने मुंबई पहुंचने के बाद सबसे पहले जो काम किये, उनमें से एक यशराज फिल्म्स (वाईआरएफ) का दौरा और भारतीय फिल्म-निर्माताओं से मिलना था। नतीजा यह रहा कि वाईआरएफ ने तीन फिल्मों की शूटिंग ब्रिटेन में करने का वादा किया है। दो ब्रिटिश विश्वविद्यालयों ने भी भारत में कैंपस खोलने का वादा किया है। विभिन्न क्षेत्रों में यह सहयोग दिखाता है कैसे परिपक्व लोकतंत्रों को मिल कर काम करना चाहिए- बिना झमेले और अहं के, शुद्ध कारोबारी रवैये के साथ।

The Suryadon
Author: The Suryadon

सच्चाई की आवाज

[ays_poll id=1]
सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य