दुष्कर्म पीड़िता का पुलिस अधिकारियों ने उड़ाया था मजाक, अब डीएसपी और थाना प्रभारी पर होगा एक्शन

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पीड़िता ने हाई कोर्ट में प्रस्तुत अपनी याचिका में कहा कि अपने साथ हुए दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए गिरवाई पुलिस थाना पहुंची थी। उस समय थाना प्रभारी सुरेंद्रनाथ यादव और डीएसपी ग्रामीण चंद्रभान सिंह चिडार मौजूद थे। लेकिन दोनों अधिकारियों ने न सिर्फ उसका मजाक उड़ाया बल्कि उसे बेहद लज्जित किया और एफआईआर नहीं लिखी।                                                                                                 प्रतिनिधि, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दुष्कर्म पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों द्वारा किए गए उपहास, दुर्व्यवहार और एफआईआर दर्ज न किए जाने को अत्यंत गंभीर मामला माना है। कोर्ट ने ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक को संबंधित थाना प्रभारी और डीएसपी के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए के निर्देश दिए हैं।

 

इसके साथ ही मामले की विवेचना को पुलिस थाना गिरवाई से हटाकर किसी अन्य अधिकारी से कराने को कहा है। अदालत ने पीड़िता के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश भी दिया है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि अधिकारी अपने विधिक दायित्वों का पालन नहीं करते, विशेषकर यौन अपराधों के मामलों में सहानुभूति नहीं दिखाते, तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।

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