छत्तीसगढ़ प्रदेश में रामालिया देव जमुना प्रसाद दुबे के परिवार की जमीन की आफरा तफरी बड़े पैमाने पर पिछले 70 वर्षों से की जा रही है यह देवघर की जमीन नामांतरण ना होने के कारण विवाद मे पड गयी जिसके कारण यह जमीन विवादित नजर आती है। यह परिवार देवघर परिवारसे जुड़ा हुआ है। जमीन का विवाद यह है कि जमीन शासकीय की गई तब ना तो सचना घर के बड़े बेटे सूर्यकांत दुबे उर्फ़ गोपाल दुबे को दी गई ना ही परिवार के अन्य लोगों को पिछले साथ ही बता दें की प्राइवेट तौर पर जमीन बेची गई तो पैसा किसे मीला। जमीन का नामांतरण ना होने के कारण कब्जा दाखिला में लोगों के द्वारा अपना नाम चढ़ा लिया गया पटवारी की मिली भगत से कारण यह है कि यह परिवार आर्थिक रूपस कमजोर हो गया है। इस परिवार के नाम से विभिन्न जगहों पर जमीन है तथा जमीन का नामांतरण सन 1982 में हुआ है 1982 और सन 1947 के बीच विभिन्न नामांतरण हुए हैं 1950 में भी नामांतरण हुए हैं जिसकी जांच होना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंदर नगर निगम सीमा क्षेत्र मे कई स्थानों का प्रयोग में लिया गया है। जिसमें बिलासपुर में मिशनहस्पिटल से सिम्स हॉस्पिटल वेंकटेश्वर मंदिर सदर बाजार की जांच की मांग सूर्यकांत दुबे द्वारा की गई है। इसके अलावा नगर निगम द्वारा शनिचरी पड़ाव पुराना बस स्टैंड व्यापार विहार आदि क्षेत्र में भूमि का उपयोग किया गया जिसकी सूचना नहीं दी गई ना ही कोई नोटिस । मसाला यह है कि यह जमीन खानदानी है। परंतु नामांतरण ना होने के कारण तथा किराएदारों के द्वारा भूमि मकान अपने नाम चढ़ा लिया गया। सूर्यकांत दुबे द्वारा लगाए गए आवेदन में यह मांग की गई है कि जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर हमें पूरी जानकारी दी तथा हम जमुना प्रसाद दुबे के पुत्र है यह प्रमाणित हम करेंगे। कई बार बिकने के कारण या जमीन विवादित नजर आती हैं छत्तीसगढ़ बनने के जमीनकी कीमत बढ़ने के करण करण भू माफिया सकरीय हो गए।
Author: The Suryadon
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