
सरकार ने वैज्ञानिक उपलब्धि के लिए केंद्र द्वारा प्रदान किए जाने वाले राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी) के दूसरे संस्करण के लिए 24 वैज्ञानिकों और वैज्ञानिकों की एक टीम की सूची का एलान किया है। साल 2024 की तरह ही, इस साल भी पुरस्कार की चार व्यापक श्रेणियां हैं: विज्ञान रत्न, विज्ञान श्री, विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार और विज्ञान टीम पुरस्कार। विज्ञान रत्न और विज्ञान श्री उन वैज्ञानिकों को दिए जाते हैं जिन्होंने क्रमशः अपने जीवनकाल और हाल ही में विशिष्ट योगदान दिया है। युवा पुरस्कार 45 सैद्धांतिक रूप से, सभी श्रेणियों में पुरस्कारों की कुल संख्या 56 तक सीमित है; हालांकि इस साल पुरस्कृत किए गए लोगों की संख्या पिछले साल के 33 से कम हैं। पुरस्कार के एलान में कई महीनों की देरी हुई है, लेकिन इससे संभावित पुरस्कार विजेताओं की व्यापक जांच-परख का संकेत मिलता है। यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कारों के पिछले संस्करणों, मसलन शांति स्वरूप भटनागर (एसएसबी) पुरस्कारों के उलट और पद्म पुरस्कारों की भावना के अनुरूप, आरवीपी के लिए कोई नकद राशि नहीं दी जाती है। लेकिन जांच-परख एक दोधारी तलवार है। पिछले साल यह बात सामने आई थी कि कुछ वैज्ञानिकों को पुरस्कार प्राप्त करने के बारे में बताया गया, लेकिन बाद में उन्हें सूचित किया गया कि उनके नाम हटा दिए गए हैं। देशभर के कई प्रमुख वैज्ञानिकों ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) के कार्यालय को पत्र लिखकर पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। इस बात को लेकर चिंताएं जाहिर की गईं थी कि कहीं वैज्ञानिक योग्यता के अलावा अन्य कारकों – मसलन, सरकारी नीति और राजनीतिक विचारधारा की आलोचना – ने भी इसमें कोई भूमिका तो नहीं निभाई हैं। पीएसए ने इन मांगों पर स्पष्ट रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है, सिवाय इसके कि चयन समिति, जिसे राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार समिति कहा जाता है (जिसकी अध्यक्षता पीएसए करते हैं और जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के सचिव और वैज्ञानिक अकादमियों के सदस्य शामिल होते हैं), ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री को पुरस्कार विजेताओं की “सिफारिश” की है। यह साफ नहीं साल से कम आयु के व्यक्तियों के लिए है और विज्ञान टीम पुरस्कार प्रौद्योगिकी के विकास में जुटी टीम के प्रयासों के लिए है।
है कि समिति द्वारा की गई सिफारिश को मंत्री पलट सकते हैं या नहीं। आरवीपी पुरस्कारों की स्थापना गृह मंत्रालय और विभिन्न विज्ञान विभागों के प्रमुखों द्वारा 2022 में इस निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद की गई थी कि अलग-अलग वैज्ञानिक विभागों द्वारा बहुत ज्यादा संख्या में पुरस्कार दिए जा रहे हैं और लिहाजा, उनकी छंटाई करना और उनके ‘कद’ को बढ़ाकर राष्ट्रीय पुरस्कारों का करना मुफीद है। यूं तो एसएसबी पुरस्कार जैसे पुरस्कारों को भी विज्ञान मंत्री के परामर्श से अंतिम रूप दिया गया है, लेकिन केंद्रीकरण और आरवीपी को ‘पद्म पुरस्कारों-जैसा’ बनाने की साफ कोशिश का मतलब यह है कि वे अपेक्षा से कहीं ज्यादा राजनीतिकरण वाले जान पड़ते हैं। अगर आरवीपी का मकसद ‘कद’ बढ़ाना है, तो सरकार को साफ तौर पर दखलअंदाजी न करने वाला नजरिया अपनाना चाहिए तथा वैज्ञानिकों को ही अपने साथियों की उत्कृष्टता का आकलन करने देना चाहिए।
Author: The Suryadon
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