नोबेल पुरस्कार विजेताओं के शोध ने प्रतिरक्षा प्रणाली को ही पुनर्परिभाषित कर दिया है

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शरीर विज्ञान (फिजियोलॉजी) या चिकित्साशास्त्र (मेडिसिन) के 2025 के नोबेल पुरस्कार ने उन खोजों को मान्यता दी है, जिन्होंने स्वप्रतिरक्षी (ऑटोइम्यून) विनियमन से जुड़ी वैज्ञानिक समझ को बदल दिया है। आज, शोधकर्ता इन विकारों के आनुवंशिक, आणविक और पर्यावरणीय निर्धारकों का पता लगा रहे हैं, जिससे शीघ्र निदान और लक्षित उपायों का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस प्रगति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैरी ब्रुन्को, फ्रेड रैम्सडेल और शिमोन सकागुची के शोध का नतीजा है, जिन्होंने नियामक टी-कोशिकाओं (ट्रेग्स) और प्रतिलेखन कारक FOXP3 की भूमिका को स्थापित किया। 1990 के दशक में, प्रतिरक्षा विज्ञानियों ने परिपक्वता के दौरान स्व-प्रतिक्रियाशील टी-कोशिकाओं के विलोपन को पहले ही परिभाषित कर दिया था, फिर भी यह प्रक्रिया स्वस्थ व्यक्तियों में स्व-प्रतिक्रियाशील टी-कोशिकाओं के बने रहने की व्याख्या नहीं कर सकी। सकागुची ने अनुमान लगाया कि परिधि में एक अतिरिक्त तंत्र अवश्य काम करता होगा। साल 1995 में, उनकी टीम ने CD4⁺ टी-कोशिकाओं के एक ऐसे उपसमूह की पहचान की जिन्हें चूहों के शरीर से निकालने पर अनेक स्वप्रतिरक्षी विकार पैदा हुए, जबकि उन कोशिकाओं को शरीर में दोबारा स्थापित करने से रोग की रोकथाम हुई। इसके बाद, सेलटेक चिरोसाइंस में कार्यरत ब्रुन्को और रैम्सडेल ने पाया कि नर स्कर्फी चूहों में गंभीर बहु-अंग स्वप्रतिरक्षा विकसित हो गई और जन्म के कुछ हफ्ते के भीतर ही उनकी मौत हो गई। वे उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) को एक्स गुणसूत्र तक सीमित करने में सफल रहे तथा डीएनए में एक ऐसे सम्मिलन की पहचान की, जिसने पहले से अज्ञात जीन को काट दिया था। उन्होंने इसका नाम FOXP3 रखा और पाया कि इसके नष्ट होने से प्रतिरक्षा प्रणाली नष्ट हो जाती है। जल्द ही, नैदानिक सहयोग से घातक स्वप्रतिरक्षी विकार वाले लड़कों में FOXP3 में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) की जानकारी मिली। इन निष्कर्षों ने मिलकर इस बात को स्थापित किया कि आत्म-सहिष्णुता ट्रेग्स के विभेदन और रखरखाव को नियंत्रित करने वाले आणविक बदलाव पर निर्भर करती है।

आजकल, स्वप्रतिरक्षी रोगों में, प्रायोगिक उपचार का मकसद ट्रेग्स का विस्तार या स्थिरीकरण करना होता है। शुरुआती नैदानिक परीक्षणों से पता चला है कि इस कोशिका आबादी को सुदृढ़ करने से व्यापक प्रतिरक्षा दमन के बिना हानिकारक प्रतिरक्षा सक्रियण को कम किया जा सकता है। प्रत्यारोपण के दौरान, प्रत्यारोपित ऊतकों को स्वीकार करने (ग्राफ्ट एक्सेप्टेंस) की प्रक्रिया में सुधार के लिए इंजीनियर्ड ट्रेग्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। कैंसर के मामले में, शोधकर्ता स्वप्रतिरक्षा को सक्रिय किए बिना प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए ट्यूमर से संबंधित ट्रेग्स की चयनात्मक कमी या पुनःप्रोग्रामिंग की संभावनाओं का पता लगा रहे हैं। चिकित्सा से परे,

The Suryadon
Author: The Suryadon

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