
आगामी 1 अक्टूबर से ब्रांडेड एवं पेटेंट दवाओं के आयात पर 100 फीसदी शुल्क (टैरिफ) का एलान करके, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उस अमेरिका में स्वास्थ्य सेवा की सुलभता को हथियार बना दिया है, जहां चिकित्सा संबंधी देखभाल पर होने वाले घरेलू व्यय का लगभग10 फीसदी हिस्सा दवाओं पर खर्च होता है। यूरोपीय संघ और जापान से होने वाले आयात पर 15 फीसदी टैरिफ की सीमा की चेतावनी, जिसके बारे में अमेरिका ने साफ किया है कि वह इसका सम्मान करेगा, इस एलान को कमजोर बनाती है क्योंकि दवाओं (फार्मा) के आयात में इन दोनों देशों का योगदान लगभग तीन-चौथाई का है। इस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा पेटेंट प्राप्त दवाओं, मसलन डेनमार्क में निर्मित वजन घटाने वाली और मधुमेह-रोधी दवाएं, वेगोवी और ओजेम्पिक, से बना है। कैंसर या दुर्लभ बीमारियों की खास दवाओं की जरूरत वाले मरीजों पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है। अमेरिका के स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि कंपनियां खास और पेटेंट प्राप्त दवाओं की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ पॉलिसीधारकों पर डालने की कोशिश करेंगी। अर्न्स्ट एंड यंग के एक अध्ययन के मुताबिक, पेटेंट प्राप्त दवाओं पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने से दवाओं की सालना लागत लगभग 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़ जाएगी। सबसे ज्यादा प्रभावित वे देश हैं, जो इस छूट से बाहर हैं। ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर — जो दवा निर्माण के केंद्र हैं — पर 100 फीसदी टैरिफ का बोझ पड़ने की आशंका है, जिससे उनके उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
भारत के विशाल जेनेरिक दवा उद्योग को फिलहाल इससे बख्श दिया गया है। अमेरिका में वितरित दवाओं में जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी 90 फीसदी है, लेकिन उनपर होने वाला खर्च लगभग 13 फीसदी ही है। भारत ने वित्तीय वर्ष 2025 में अमेरिका को 10.5 अरब डॉलर से ज़्यादा मूल्य के ‘फॉर्मूलेशन’ निर्यात किए। इसलिए, जेनेरिक या बायोसिमिलर दवाओं को शामिल करने के वास्ते टैरिफ के दायरे में किया गया कोई भी विस्तार भारत के सबसे सफल निर्यात क्षेत्रों में से एक के लिए झटका साबित हो सकता है। इस बात को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है कि सक्रिय दवा सामग्रियां (एपीआई) टैरिफ के दायरे में आयेंगी या नहीं। वैश्विक स्तर पर एपीआई की आपूर्ति में भारत और चीन का दबदबा है। खुद अमेरिका नवीन दवाओं का एक अग्रणी उत्पादक बना हुआ है, जो दुनिया भर में अरबों डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात करता है। आयातित पेटेंट दवाओं पर नए टैरिफ अमेरिकी निर्यात की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता पर किस कदर प्रभाव डालेंगे, यह अभी साफ नहीं है। ट्रम्प का यह कदम प्रभावशाली संस्था, पीएचआरएमए के एतराजों के बावजूद आया है। इस संस्था ने चेतावनी दी थी कि संरचनात्मक
Author: The Suryadon
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